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लेकिन जरूरत पड़ी तो खौफनाक भी बन जाएंगे

तेरी अकड़ को तो हम चाय में डुबोकर पी जाएं,

हम वहाँ ठहरते हैं जहाँ लोगों की सोच भी नहीं जाती।

पर हमसे उलझना तेरी हिम्मत से बाहर है। ⚡

बदमाशी हमारी, किसी की समझ से परे होती है।

और तुम्हे लगता है मैं तुम्हारी सुनूंगा…!

— इस पोस्ट में आपको सबकुछ एक जगह मिल जाएगा!

हम वो हैं जो खड़े हों तो भीड़ खुद पीछे हटती है।

तेरी शक्ल पे हँसना हमारी आदत बन चुकी है,

कि हम बदमाश ही नहीं, बदमाशों के बादशाह हैं।

क्या बदमाशी शायरी में सख्त भाषा here का इस्तेमाल करना जरूरी है?

अंदाज़ ऐसा रखो कि दुश्मन भी सोच में पड़ जाए,

ना खुद कुछ कर पाए, ना हमें झुका पाने की रवानी है।

तू जब भी हंसती है, लगता है कुछ सोच कर हंसी है,

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